कश्मीर में सेना ने जिसे जीप से बांधकर घुमाया, वह मिल गया है

Source : TheLallantop

बीते दिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें भारतीय सेना कश्मीर में एक स्थानीय युवक को जीप के बोनट पर बांधकर घुमा रही थी. दिखाया गया कि गाड़ी को पत्थरबाजों से बचाने के लिए सेना ने ऐसा किया. वीडियो में कहा जा रहा था, ‘ऐसा हाल होगा, पत्थर चलाने वालों ये हाल होगा’. जीप पर बांधे गए इस शख्स की पहचान हो गई है. 26 साल के इस लड़के का नाम फारूक अहमद डार है, जो पेशे से दर्जी है. बडगाम में रहने वाला फारूक बताता है कि उसने जिंदगी में कभी सेना पर पत्थर नहीं फेंके.

फारूक अहमद

इस वीडियो के पहले 11 अप्रैल को घाटी का एक और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें CRPF जवान जम्मू-कश्मीर में हुए उपचुनाव के बाद EVMs और पोलिंग पार्टी के साथ पैदल कहीं जा रहे थे और स्थानीय युवक उनके साथ मारपीट कर रहे थे. मशीनों को बचाने के लिए जवानों ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया. इस वीडियो पर सेना के जवानों की खूब तारीफ हुई, लेकिन युवक को जीप से बांधने वाले वीडियो के बाद कश्मीर में सेना की बहस फिर वहीं आ गई, जहां से शुरू हुई थी.

कश्मीर में CRFP जवान को पीटता एक स्थानीय युवक

फारूक बडगाम के चिल गांव का रहने वाला है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान उसने बताया, ‘मैं पत्थरबाज नहीं हूं. मैंने अपनी पूरी जिंदगी में सभी सेना पर पत्थर नहीं फेंके. मैं शॉल की कढ़ाई का काम करता हूं और थोड़ी-बहुत बढ़ईगिरी जानता हूं. मैं यही काम करता हूं.’ फारूक ने बताया कि उसे 11 अप्रैल को सुबह 11 बजे से चार घंटे तक जीप से बांधकर घुमाया गया. तब से उसका बांया हाथ सूजा हुआ है और बैंडेज बंधा हुआ है.

सेना के हत्थे कैसे चढ़ा फारूख

फारूक ने बताया कि 11 अप्रैल को वह अपने घर से 17 किमी दूर गमपोरा जा रहा था. वहां उसके किसी रिश्तेदार का चौथा था, जिसकी उपचुनाव वाले दिन मौत हो गई थी. वह बाइक से अपने भाई और पड़ोसी के साथ जा रहा था. उटलीगाम में उन्होंने एक महिला को चुनाव के खिलाफ प्रदर्शन करते देखा और यहीं उससे गलती हो गई. उसके बाइक से उतरने से पहले ही जवान वहां पहुंच गए. वह बताता है,

‘उन्होंने मुझे पीटा और फिर जीप से बांध दिया. उन्होंने मुझे नौ गांवों में घुमाया. एक महिला ने मुझे बचाने की कोशिश की थी, लेकिन तभी हवाई फायर की गई और वो सब भाग गए. रास्ते में सैनिक चिल्ला रहे थे, ‘आओ, अपने ही आदमी पर पत्थर चलाओ आकर.’ लोग दूर भाग रहे थे, वो डरे हुए थे. मुझे एक भी लफ्ज बोलने से मना किया गया था.’

अपनी मां के साथ फारूक

फारूक को उटलीगाम से सोनपा, नाजन, चाकपुरा, हांजीगुरू, रावलपोरा, खोसपोरा और अरीजल जैसे गांवों में 25 किमी तक घुमाया गया. हार्दपांजो के CRPF कैंप में गाड़ी रोक दी गई. शाम करीब चार बजे उसे राष्ट्रीय रायफल्स के कैंप ले जाया गया और करीब साढ़े सात बजे उसे उसके सरपंच के पास छोड़ दिया गया. फारूक ने बताया कि बांधने के बाद सेना के जवानों ने कहीं भी उसके मारपीट और पूछताछ नहीं की.

नहीं करना चाहता शिकायत

उस घटना से फारूक इतना डरा हुआ है कि अब वह जवानों के खिलाफ शिकायत भी नहीं करना चाहता. कहता है, ‘गरीब लोग हैं, क्या करेंगे शिकायत करके. मैं अपनी मां के साथ अकेले रहता हूं. मां 75 की है और उसे अस्थमा है. मुझे डर लग रहा है. मेरे साथ कुछ भी हो सकता है. मैं पत्थरबाज नहीं हूं.’ फारूक की मां फैजी कहती हैं, ‘हम कोई जांच नहीं चाहते. हम गरीब लोग हैं. मैं अपने बेटे को खोना नहीं चाहती.’

पिछले वीडियो की तरह इस वीडियो ने भी सोशल मीडिया से लेकर सरकार तक खूब खलबली मचाई है. इस बार के बवाल के बाद सीएम महबूबा मुफ्ती ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है, जबकि सेना का कहना है कि वह वीडियो की जांच करा रही है.

देखिए फारूक को जीप से बांधकर घुमाने का वीडियो:

साथ में, कश्मीर में CRPF जवानों के साथ बिगड़ैलों का सलूक:


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