अब एक स्विच दबाने से रुक सकेगा गर्भ बिना किसी दर्द के

बीमेक एसएलवी. गर्भ रोकने की बहुत ही आसान मशीन. लेकिन ये मर्दों के लिए है.

इसे बनाया है जर्मनी के साइंटिस्ट क्लेमेंस बिमेक ने. ये एक बेहद छोटी गर्भनिरोधक मशीन है, जिसे मर्दों के शरीर के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में लगाते हैं. इसके मैकेनिकल स्विच के जरिए बॉडी में स्पर्म के फ्लो को रोका जा सकता है. इस स्विच को ऑन करते ही पुरूष इनफर्टाइल हो जाएंगे यानी स्पर्म उनके शरीर से बाहर निकलेंगे ही नहीं.

इसको शरीर में डालने में केवल आधा घंटा लगता है. और इसे बड़ी आसानी से ऑन ऑफ करके हैंडल किया जा सकता है. इसे लगाने के बाद ये स्पर्म के बहाव को दूसरी तरफ मोड़ देगा और पीनिस तक नहीं पहुंचने देगा.

बाद में कभी भी अगर मर्द पिता बनना चाहे तो स्क्रोटम के पास लगे स्विच को हाथ से ही बंद कर सकता है. ऐसा करते ही स्पर्म का बहाव फिर से पीनिस की तरफ होने लगेगा.

फोटो: Bimek SVL

आम तौर पर गर्भ रोकने के लिए नसबंदी का इस्तेमाल किया जाता है. पुरुषों की भी नसबंदी होती है पर वो ज्यादा प्रचलन में नहीं है. औरतों की नसबंदी ज्यादा प्रचलन में होती है, हालांकि ये दिक्कतें पैदा करती है. क्लेमेंस का दावा है कि यह तरीका नसबंदी जितना ही कारगर साबित होगा. बिमेक अपनी इस तकनीक को खुद पर आजमा भी चुके हैं.

क्लेमेंस के मुताबिक,

‘जल्दी ही 25 मर्दों पर इसका टेस्ट करेंगे. यह स्विच 1.8 सेंटीमीटर लंबा और 2 ग्राम का है. इसे सर्जरी के जरिए शरीर के अंदर लगाने में आधा घंटा लगता है. ये वैसेक्टॉमी से कहीं ज्यादा आसान है. इसमें किसी भी तरह की सर्जरी की जरूरत नहीं है.’

हालांकि इसको ले के कई गलतफहमियां भी बनी हुई हैं लोगों के अंदर. कुछ लोग ये मान लेते हैं कि सेक्स करने से ठीक पहले इस स्विच को ऑन-ऑफ किया जा सकता है. पर ऐसा नहीं है. शरीर स्पर्म बनाने के लिए सेक्स का इंतजार नहीं करता है. फिर इसी तरह से ये मान लिया जाता है कि इस मशीन के चलते सेक्शुअल समस्या हो जाती है लोगों को. ये भी गलत है. फिर इसके चलते स्पर्म की क्वालिटी खराब होने का डर भी फिजूल होता है. पर ये भी नहीं है कि ये फूल-प्रूफ मेथड है.

बिमेक इस मशीन पर बहुत पहले से काम कर रहे हैं. पर फंडिंग ना होने की वजह से काम रुका हुआ था. क्लीनिकल ट्रायल नहीं कर पा रहे थे. पर अब उनको फंडिंग जुटी है तो आशा बंधी है. बिमेक सबको खुद का उदाहरण देते हैं कि कोई दिक्कत नहीं होती.

भारत में भी बन चुकी है ऐसी मशीन

सुजॉय के गुहा एक बॉयोमेडिकल साइंटिस्ट हैं. इन्होंने रिवर्सिबल इनहिबिशन ऑफ स्पर्म अंडर गाइडेंस (RISUG) इन्वेंट किया था. इसको मर्द के रिप्रोडक्टिव अंग में डाल दिया जाए तो ये कॉन्ट्रासेप्टिव की तरह ही काम करता है. इसको डालकर 10 साल तक के लिए निश्चिंत रहा जा सकता है. और सोडियम बाइकॉर्बोनेट का इंजेक्शन देकर वापस निकाला जा सकता है.

वो 200 मर्दों पर इस क्लीनिकल ट्रायल का सफलतापूर्वक करा चुके हैं.

बच्चे पैदा करने के लिए मर्द और औरत दोनों ही बराबर जिम्मेदार हैं. लेकिन जब गर्भ रोकने के लिए जतन करने की बारी आती है तो सारा बोझ औरतों के कंधे पर डाल दिया जाता है. कई केसेज में देखा गया है कि गर्भ-निरोध से औरतों के स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ता है. पुरुषों के लिए नसबंदी कराना ज्यादा आसान होता है.

पर ऐसी कई वजहें हैं जो मर्दों के कॉन्ट्रासेप्शन को मुश्किल बनाती हैं

1. औरतों के शरीर में 1 महीने में 1 अंडा बनता है, जबकि मर्द के शरीर से लाखों स्पर्म निकलते हैं.

2. एक माइंडसेट है कि औरतें ही प्रेग्नेंट हो सकती हैं इसलिए प्रेग्नेंसी रोकने की जिम्मेदारी औरतों की ही है.

3. कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल औरतों की माहवारी से जुड़ी दिक्कतों में मदद करता है. जबकि मर्दों के साथ ऐसी कोई बात नहीं है.

4. मर्दों के लिए जितने भी कॉन्ट्रासेप्टिव्स बनाए गए हैं, वो गैर-परंपरागत हैं. ये सस्ते और लंबे वक्त टिकने वाले भी होते हैं. पर फार्मास्यूटिकल कंपनियां मुनाफा कमाने के फेर में इसको प्रमोट नहीं कर रही हैं.

5. ये प्रोडक्ट पहले से ही मौजूद औरतों के कॉन्ट्रासेप्टिव के बाजार को नुकसान पहुंचाता है.


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