हर 3-4 साल में 500 और 2000 के नोटों में होगा ये बड़ा बदलाव

SOURCE : TheLallantop

अब से तीन-चार साल बाद अगर 500 और 2000 का नोट आपको बदला हुआ नज़र आए तो हैरान मत होना. क्योंकि सरकार नोटों के सिक्योरिटी फीचर्स में एक तय अंतराल पर बदलाव करने के बारे में सोच रही है. नोटबंदी से जाली नोटों की तो बैंड बज गयी थी. मगर अब फिर से जाली नोट छपने लगे हैं.

पिछले चार महीनों में भारी मात्रा में नकली नोट पकड़े गए हैं. 2000 के जो नकली नोट ज़ब्त किए गए उनमें 17 सिक्योरिटी फीचर्स में से 11 ऐसे मिले जो कॉपी कर लिए गए. फाइनेंस और होम मिनिस्ट्री की एक बैठक में ये फैसला लिया गया है कि नोटों के फीचर बदलते रहने से जाली नोटों पर रोक लगाई जा सकती है. मीटिंग में सेंट्रल होम सेक्रेटरी राजीव महर्षि समेत फाइनेंस और होम मिनिस्ट्री के सीनियर अफसर मौजूद थे.

होम मिनिस्ट्री के अफसरों ने इस कदम पर समर्थन जताया और कहा कि ज्यादातर विकसित देश अपने नोटों के सिक्योरिटी फीचर 3-4 साल में बदल देते हैं. और भारत को भी यह तरीका अपनाना चाहिए.

नए नोटों में नहीं बदले फीचर

जब नोटबंदी हुई तो 1000 की जगह 2000 का नोट लाया गया. लेकिन सिक्योरिटी फीचर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया. इसी तरह 1987 में लाए गए 500 के पुराने नोट में करीब 10 साल पहले बदलाव किए गए थे. अफसरों का कहना है कि 500 और 2000 के नए नोटों में कोई एडिशनल सिक्योरिटी फीचर नहीं थे, बल्कि ये पुराने 500 और 1000 के नोटों की ही तरह ही हैं.

11 फीचर कॉपी कर लिए गए

नोटों में 17 सिक्योरिटी फीचर थे. लेकिन जो जाली 2000 के नोट पकड़े गए उनमें 11 फीचर ऐसे थे जो हुबहू कॉपी कर लिए गए. जो फीचर कॉपी किए गए उनमें ट्रांसपेरेंट एरिया, अशोक स्तंभ, वॉटर मार्क, फॉन्ट, आरबीआई गवर्नर के दस्तखत और गारंटी क्लॉज़ शामिल था. नोटों पर बने चंद्रयान, स्वच्छ भारत का लोगो और प्रिंटिंग ईयर हूबहू छपा था. प्रिंटिंग और कागज़ की क्वालिटी की वजह से ये नोट पकड़ लिए गए.

अफसरों का दावा है कि नकली नोटों के साथ गिरफ्तार हुए लोगों का कहना है कि 2000 के नकली नोट पाकिस्तान में छापे जा रहे हैं और इस काम में आईएसआई उनकी मदद कर रही है. दावा है कि इन नकली नोटों को बांग्लादेश के रास्ते भारत भेजा जा रहा है.

400 करोड़ के नकली नोट

एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया में किसी भी समय 400 करोड़ रुपये के जाली नोट होते हैं. हर साल 70 करोड़ रुपये के नकली नोट इंडियन इकॉनमी में चलन में आ जाते हैं. एजेंसियां नकली नोटों का एक तिहाई हिस्सा ही पकड़ पाती हैं. यानी हमारी इकॉनमी के समांतर एक जाली नोटों की इकॉनमी बन जाती है जो खरपतवार की तरह हमें खाए जाती है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक आईएसआई सालाना नकली नोटों से 500 करोड़ रुपये कमाती है. पाकिस्तान में बनने वाले जाली भारतीय नोटों में आईएसआई का 30-40 परसेंट हिस्सा रहता है.

इन्हीं खतरों को देखते हुए. भारत सरकार ये बड़ा कदम उठाने की बारे में विचार कर रही है. अभी सिर्फ विचार किया जा रहा है. अभी हड़बड़ाइए नहीं.


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